अक्सर ये आपत्ति जताई जाती है कि मेराज की रात मे रसूल सल्ल. ने दोज़ख मे बहुतायत से औरतों को देखा.. इसका अर्थ है कि अल्लाह स्त्री पुरुषों में लिंग के आधार पर भेद करता है और स्त्रियों को केवल उनके स्त्री होने के अपराध में दोज़ख मे भर देगा....!!!
.... आइये इस आपत्ति का उत्तर देख लें...!!!
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.... बेशक ऐसा कुछ हदीसो मे दर्ज है कि नबी सल्ल. ने जन्नत मे गरीब और सताए हुए लोगों को बहुतायत से पाया जबकि दोज़ख मे स्त्रियों को,
..... पर ऐसे दृश्य नबी सल्ल. ने क्यों देखे और क्यों उनका वर्णन किया ये समझने के लिए आपको ये बात दिमाग़ मे बिठानी चाहिए कि नबी सल्ल. अल्लाह की ओर से मानवजाति के लिए नियुक्त एक आध्यात्मिक गुरु हैं, और उन्हें जो कुछ भी दिखाया सुनाया जाता है वो अकारण नही, बल्कि मानवजाति को कोई अच्छी शिक्षा देने के लिए ही दिखाया सुनाया जाता है
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.... मेराज की रात को भी सिर्फ एक सैर या नबी सल्ल. को सम्मानित करने की दृष्टि से देखने की बजाय अपने दृष्टिकोण को थोड़ा और विकसित कीजिए, क्योंकि इस यात्रा के कई मकसद थे जिन्हें समझने की जरूरत है ...
.... सबसे पहले ये समझने की ज़रूरत है कि मेराज की रात की घटनाओं को कुरआन पाक सूरह बनी इसराईल की 60 वीं आयत मे एक "रुया" यानि प्रतीकात्मक दृश्य बताया गया है.... यानी इस रात में नबी सल्ल० द्वारा देखी, व अनुभव की गई बातों के गहरे निहितार्थ थे.... जैसे इस रात मे हज़रत मोहम्मद सल्ल० की तमाम नबियों से मुलाक़ात के पीछे ये निहितार्थ था, कि हर नबी एक दूसरे का मित्र और भाई है, और मुस्लिमों को भी हर नबी का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना नबी सल्ल० का, मस्जिद ए अक्सा के स्थान पर पहुँचने का निहितार्थ था कि तमाम इसराइली नबियों की इबादतगाह रहा वो स्थल भी मुसलमानों के लिए क़ाबा शरीफ़ के बाद एक बरकतों वाला तीर्थ स्थल रहेगा
.... इसी अनुक्रम मे नबी सल्ल. को जन्नत और दोज़ख के प्रतीकात्मक दृश्य दिखाए गए थे, आप ये इस्लामी वविश्वास जानते होंगे कि भविष्य में होने वाली क़यामत से पहले तक इस संसार में मरने वाला कोई भी व्यक्ति जन्नत या दोज़ख में नही गया है, और अभी सभी मृतक एक ऐसे आयाम में हैं जिसे "बरज़ख़" कहा जाता है.... सो जब मेराज की रात में नबी सल्ल० को जन्नत में गरीब और सताए हुए लोग दिखाए गए, तो वो उस समय की वास्तविकता नही था, बल्कि केवल एक शैक्षिक दृश्य था, जिसके पीछे दुनिया में दुख और अभाव सह लेने, पर अत्याचार का मार्ग न लेने वाले लोगों को सांत्वना देने का उद्देश्य था जिन्होंने सत्यनिष्ठा पर चलते हुए कष्टपूर्ण जीवन गुजारना स्वीकारा है, तो उनके लिए ये खुशखबरी है कि वे तमाम सब्र करने वाले लोग जन्नत के अधिकारी होंगे...
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...इसी तरह इस रात मे दोज़ख मे औरतों को बहुतायत से आप सल्ल. को दिखाया जाना भी उस समय की वास्तविकता न होकर केवल एक प्रतीकात्मक व शैक्षिक दृश्य था,
...औरतों के बड़ी संख्या मे दोज़ख मे होने वाली हदीस मे आगे ये लिखा है कि क्योंकि औरतें अपने पति के साथ अकारण ही नाशुक्रगुज़ारी करती हैं, इस कारण स्त्रियों का दोज़ख मे होना दिखाया गया ... इस हदीस मे ये बात केवल ये शिक्षा देने के लिए की गई है कि अपनी मृत्यु से पहले ही स्त्रियाँ अपने दोज़ख मे जाने के एक सम्भावित कारण को जान लें और इस कारण, यानि नाशुक्री की आदत को त्यागकर अपना जन्नत मे जाना सुनिश्चित कर लें....
...... पवित्र क़ुरआन में बार बार तमाम स्त्री पुरुषों से यही कहा गया है कि वो जीवन मे अपने कर्म सुधार लें तो उनका जन्नत में जाना निश्चित हो जाएगा, और जन्नत और दोज़ख का फ़ैसला प्रत्येक के कर्मों के आधार पर होगा, न कि लिंग के आधार पर
..... न किसी के स्त्री होने के आधार पर उसे दोज़ख में भेज दिया जाएगा और न किसी के केवल पुरूष होने भर पर वो जन्नत का अधिकारी हो जाएगा... पवित्र कुरआन में स्त्री पुरूष में कर्मों के प्रतिदान में समानता की ये बात बहुत स्पष्टता से इस तरह बता दी गई है
..... " मुस्लिम पुरुष और मुस्लिम स्त्रियाँ, ईमानवाले पुरुष और ईमानवाली स्त्रियाँ, निष्ठा्पूर्वक आज्ञापालन करनेवाले पुरुष और निष्ठापूर्वक आज्ञापालन करनेवाली स्त्रियाँ, सत्यवादी पुरुष और सत्यवादी स्त्रियाँ, धैर्यवान पुरुष और धैर्य रखनेवाली स्त्रियाँ, विनम्रता दिखानेवाले पुरुष और विनम्रता दिखानेवाली स्त्रियाँ, सदक़ा (दान) देनेवाले पुरुष और सदक़ा देनेवाली स्त्रियाँ, रोज़ा रखनेवाले पुरुष और रोज़ा रखनेवाली स्त्रियाँ, अपने गुप्तांगों की रक्षा करनेवाले पुरुष और रक्षा करनेवाली स्त्रियाँ और अल्लाह को अधिक याद करनेवाले पुरुष और याद करनेवाली स्त्रियाँ - इनके लिए अल्लाह ने क्षमा और बड़ा प्रतिदान तैयार कर रखा है"
(सूरह अहज़ाब, आयत-35)
..... तो वास्तव मे शबे मेराज मे नबी सल्ल. को दिखाए गए वो दृश्य केवल भले पुरूषों और भली स्त्रियों को छोटी छोटी उन गलतियों के प्रति भी चेताते हैं, जिनकी ओर आमतौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता, और इन गलतियों को करते वक्त कोई ये नहीं सोचता कि वो गलत कर रहा है, तो नबी सल्ल० द्वारा इन छोटी छोटी गलतियों के प्रति भी ईमानवाले स्त्री पुरुषों को सचेत कर के उन्हें पूरी तरह पवित्र हो जाने की सीख दी गई है, ... वास्तव मे उस समय तक कोई भी प्राणी जन्नत या दोज़ख मे नही गया था, और न ही अकारण कोई स्त्री या पुरुष दोजख मे कभी जाएंगे ही, बल्कि उस वृत्तांत पर ध्यान देकर सावधान हो जाने वाले लोग तो अपना दोज़ख़ में जाना टाल लेंगे ... इन शा अल्लाह...!!
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