ऐसे सवालों से अक्सर मैं दो चार होता रहता हूँ कि अगर अल्लाह स्त्री पुरुष में अधिकारों के दृष्टिकोण से भेद नहीं करता तो किसी स्त्री को अल्लाह ने नबी बनाकर क्यों नहीं भेजा, नबी होने का सम्मान अल्लाह ने हमेशा पुरुषों को क्यों दिया स्त्रियों को क्यों नही ? क्या अल्लाह के अनुसार स्त्री धर्मगुरु बनने लायक बुद्धि नही रखती, या स्त्री को अल्लाह नबी बनने लायक पवित्र नही समझता ..!!!
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...... मैं समझता हूं कि इन सारे प्रश्नों का उत्तर हमें मरियम अलैहिस्सलाम के रुप में मिल जाता है, ... इनके रूप में हमें एक महिला नबी का नाम तो क़ुरआन से ही मालूम चल जाता है,
...मरियम अलैहिस्सलाम को क़ुरआन में बहुत महत्व दिया गया है और ये कहा गया है कि उन्हें अल्लाह ने पवित्र उद्देश्य के लिए चुना था, इस आधार पर मुस्लिम समुदाय की एक बड़ी तादाद हज़रत मरियम को महिला नबी के रूप में पहचानती है, और इस उदाहरण से ये भी सिद्ध होता है कि न अल्लाह स्त्रियों को अपवित्र मानता है और न उनमें धर्मगुरु बनने लायक बुद्धि की कमी ही मानता है....
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... तथा क़ुरआन में मरियम अलैहिस्सलाम का ये एक उदाहरण होने से इस संभावना को भी बल मिलता है कि सम्भवतः और भी महिला नबी इतिहास में हुई हों, क्योंकि क़ुरआन में तमाम नबियों का ज़िक्र नही है, बल्कि केवल कुछ का वृतांत अल्लाह ने सुनाया है, तो हमे इस बारे में पता नहीं,
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वैसे आनुपातिक आधार पर अनुमान ये लगता है कि महिला नबियों की संख्या पुरूष नबियों के अनुपात में बेहद कम थी,
... उसका स्पष्ट कारण भी नज़र आता है, इस बात में कोई संदेह नही कि महिला बहुत अच्छी धर्मगुरु बन सकती थीं, पर नबी केवल गुरु ही नहीं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों के विद्रोही भी होते थे, और विद्रोह करने के फलस्वरूप उनका प्रबल विरोध भी हुआ करता था क़ुरआन में जितने भी नबियों के वृतांत हैं, उन्हें पढ़कर पता चलता है कि नबियों को ईश्वर का सन्देश लोगों को सुनाते समय बेहद कठिन परिस्थितियों से गुज़रना होता था, इब्राहीम, ईसा, अय्यूब, मुहम्मद सल्ल० तमाम नबियों ने भयंकर शारीरिक कष्ट सहे... क्योंकि स्त्रियों की प्रकृति कोमल होती है इसलिए उन्हें सामान्यतया इन कष्टों में नही डाला गया.... अन्यथा प्रश्न करनेवाले ये प्रश्न करते कि अल्लाह ने कोमल स्त्रियों को नबी क्यों बनाया जिन पर इतने अत्याचार हुए ....!!!
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..... पर अल्लाह ने धर्म के ज्ञान में कई स्त्रियों को आगे बढ़ाया, चाहे वो हज़रत मरियम रही हों, या फ़िरऔन की पत्नी "आसिया", या मुस्लिम सन्त राबिया बसरी रह० .... और सबसे प्रमुख महिला धर्मगुरु का उदाहरण हज़रत मोहम्मद सल्ल० की पवित्र पत्नी हज़रत आयशा रज़ि० का है जिन्होंने धार्मिक ज्ञान को आगे बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान दिया है, और इनके साथ नबी सल्ल० का विवाह ईश्वरीय अभिप्रेरण से ही हुआ था, जिससे फिर यही सिद्ध होता है कि अल्लाह स्त्रियों और पुरुषों में अन्यायपूर्ण भेद नहीं करता, ये तो इंसान है जो अल्लाह की युक्तियुक्त बातों को समझ नहीं पाता, और जहाँ अल्लाह ने स्त्रियों के साथ रहम का मुआमला किया है, उसे अल्लाह का अन्याय बताने लगता है !!!
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(कुछ उलमा वर्ग के अनुसार हज़रत मरियम नबी न होकर केवल अल्लाह की एक वलीया थीं पर हमारी जहां तक स्टडी है, आमतौर पर औलिया को ख़बर देने के लिए अल्लाह फरिश्तों को नही भेजता, ये नबियों के लिये खास समझा जाता है कि उन्हें अल्लाह के फ़रिश्ते दिखाई दें, और फ़रिश्ते के ज़रिये अल्लाह उनसे बातें करे
वलियों के लिए ख्वाब या इलहाम का तरीक़ा अल्लाह अपनाता है, यानी औलिया को साफ़ साफ़ फ़रिश्ते नही दिखते,)
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