रविवार, 17 जनवरी 2021

क़ुरआन में ध्रुवीय क्षेत्र का दिन

अक्सर कुछ लोग क़ुरआन पर ये एक ये आक्षेप किया करते हैं कि क़ुरआन ईश्वर की रचना नही, बल्कि मनुष्य की ही  रचना है, इसका प्रमाण ये है कि क़ुरआन में उन क्षेत्रों का ज़िक्र कतई नहीं है, जिन्हें हज़रत मोहम्मद सल्ल० ने कभी देखा नही था, या जिन क्षेत्रों के बारे में उन्होंने सुना नही था, जैसे कि कुरआन में नार्थ पोल-साउथ पोल के बारे में कुछ नहीं लिखा, क्योंकि इन क्षेत्रों की जानकारी अरब के लोगों को क़ुरआन लिखे जाने के समय थी ही नहीं, सो हज़रत मोहम्मद सल्ल० भी इन क्षेत्रों का ज़िक्र नही कर पाए...

.... इसी आक्षेप से मिलता जुलता सवाल कुछ साल पहले रमज़ान के समय एक साहब ने ये पोस्ट  करके किया था कि "कनाडा, अमरीका का राज्य अलास्का, ग्रीनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, रूस और आइसलैंड इन देशों के कुछ हिस्से अंटार्कटिक ध्रुव के उस क्षेत्र में आते हैं जहां पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई घूमती है. इसलिए गर्मियों के मौसम में सूरज डूबता ही नहीं, उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव पर तो सूरज वर्ष में एक बार उगता है और एक बार डूबता है, जिसका परिणाम यह होता है कि लगभग छह महीने दिन रहता है और छह महीने रात, तो कृपया सावधान रोजेदार मुसलमान इन क्षेत्रों में ना जाए! नहीं तो पूरे महीने रोजा रखना पड़ जाएगा !! .. चौदह सौ साल पहले शायद अल्लाह को खबर नहीं थी कि ऐसी भी जगह है जहाँ 6 महीने दिन और 6 महीने रात होती है। पता होता तो ऐसे नियम बनाता ??"

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 तब मैंने उन भाई को एक हदीस के ज़रिये उत्तर दिया था कि इस्लाम मे ऐसी जगहों, जहाँ दिन महीनों लम्बा होता हो, के लिए भी रोज़े और नमाज़ का सुविधाजनक विधान मौजूद है, और जहाँ धरती की इस विशेषता के प्रति बाकी धर्म मौन हैं, इस्लाम मे इस मुद्दे पर भी बात की गई है....

 .... हदीस मे स्पष्ट ज़िक्र है कि दुनिया की जिन जगहों पर दिन और रात 24 घण्टे के दायरे मे नहीं आते, बल्कि बेहद लम्बे होते हैं वहाँ पर मुस्लिमों को इबादत करने के लिए दिन को 24 घण्टे के छोटे टुकड़ों मे बांट देना चाहिए .... ठीक इसी आधार पर ऐसी जगहों पर रोज़े भी 24 घण्टे के दायरे मे रखने चाहिए,  

.... मुस्लिम शरीफ़ की किताब 41, हदीस नम्बर 7015 पर एक लम्बी हदीस का विषयसंगत भाग ये था कि, नबी सलल्लाहो अलैहि वसल्लम ने सहाबा से फरमाया कि दज्जाल का प्रभाव 40 दिन तक दुनिया पर रहेगा, इनमें से एक दिन एक साल के बराबर होगा, एक दिन एक महीने के बराबर, एक दिन एक हफ्ते के बराबर, और शेष दिन तुम्हारे (24 घण्टे के) दिनो के बराबर" (अवश्य ही यहाँ दज्जाल के प्रभाव वाले देशों के दिन की अवधि बताई गई है )

सहाबा ने पूछा कि क्या जो एक दिन एक साल के बराबर लम्बा होगा (छह महीने का दिन व छह महीने की रात होगी) उस दिन के लिए क्या हमारे एक दिन की पांच नमाज़े पर्याप्त होंगी ?

नबी सल्ल. ने उत्तर दिया "नहीं, बल्कि उस दिन को (24 घण्टे के दिन के बराबर) भागों मे बांटो, (और उसके अनुसार नमाज़े पढ़ो) ॥"

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....इस्लामी विद्वानों ने ऐसी जगहो पर सहरी और इफ्तार के वक्तो का संतोषजनक अनुमान देने के लिए ये फतवा दिया है कि उन जगहों के निवासी अपने मुल्क से सबसे करीब उस जगह जहाँ दिन और रात 24 घण्टे के दायरे मे आते हों, के दिन के बराबर का अपना एक दिन मानकर उतने ही वक्त का रोज़ा रखे...!!

यानी इस्लामी साहित्य में अनियमित अवधि के दिन होने पर इबादत के टाइम मैनेजमेंट का उत्तर तो मौजूद है....!!!

.... पर क्या ऐसी अनियमित अवधि के दिन के बारे में  क़ुरआन में कुछ भी नही कहा गया है ? 

... ध्यान से देखिए, कहा गया है... क़ुरआन मे सूरह कहफ़ (सूरह नम्बर 18) की सत्रहवीं आयत में एक सूत्र मिलता है कि दुनिया में कहीं कोई ऐसी जगह भी है जहां सूर्य बहुत छोटे से दायरे में घूमता दिखता है, 

....... "और तुम सूर्य को उसके उदित होते समय देखते तो दिखाई देता कि वह उनकी गुफा से दाहिनी ओर को बचकर निकल जाता है और जब अस्त होता है तो उनकी बाई ओर से कतराकर निकल जाता है। और वे है कि उस (गुफा) के एक विस्तृत स्थान में हैं। यह अल्लाह की निशानियों में से है। जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए, वही मार्ग पानेवाला है और जिसे वह भटकता छोड़ दे उसका तुम कोई सहायक मार्गदर्शक कदापि न पाओगे" (18:17)

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..... ध्रुवीय क्षेत्रों के पास के देशों में  ऐसा ही नज़ारा दिखाई देता है कि सूरज जहां से उगता है उससे थोड़ी ही दूरी पर थोड़े ही समय में डूब भी जाता है, यानी सूरज आकाश में ऊपर जाकर अपने उगने की विपरीत दिशा में नही डूबता, बल्कि जिस दिशा में उगता है उसी दिशा में थोड़ा आगे बढ़कर डूब जाता है.. और यदि बीच में कोई इमारत हो तो ये लगे कि उसके दायें से उग कर बाएं डूब जा रहा है, सर्दियों में सूरज का ये "आर्क" और ज़्यादा छोटा हो जाता है, ... इस लेख में संलग्न चित्र ध्रुवीय क्षेत्र में सूरज के एक ऐसे ही छोटे आर्क का चित्रण कर रहा है...!!

... अलास्का में ऐसे ही एक नज़ारे की यूट्यूब लिंक भी आपको दे रहा हूं - 
https://m.youtube.com/watch?v=8-JmBY4OJ50
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... तो क़ुरआन में उस छोटे दिन के उदाहरण से असामान्य अवधि के दिन में समय को बराबर भागों में बांटकर इबादत की शिक्षा देने वाली इस हदीस की भी पुष्टि होती है, और इस आरोप का भी खण्डन होता है कि क़ुरआन में या इस्लाम में ध्रुवीय क्षेत्रों के बारे में कुछ कहा नही गया...!!!

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