रविवार, 17 जनवरी 2021

आध्यात्मिकता की शक्ति

मेरे मित्र जान अब्दुल्लाह भाई ने आध्यात्मिकता की शक्ति के प्रयोग से सांसारिक जीवन के व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के बारे में पोस्ट की, तो मैंने उनसे कहा था कि इस अध्यात्मिकता की शक्ति के प्रताप से तो मैं अच्छी तरह वाकिफ़ हूँ, इस शक्ति को मैंने ख़ुद कई बार महसूस किया है, .... भाई ने पूछा था कि "कैसे महसूस किया, कुछ हमें भी बताओ ?"
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.... तो भाई, अपना एक पूर्व अनुभव पोस्ट कर रहा हूँ, पढ़ियेगा.....
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...... "लोग अक्सर मुझसे अल्लाह के होने का सबूत मांगते हैं ... और कई बार तरह तरह के तर्क देकर मेरा विश्वास अल्लाह पर से डिगाने की पूरी तैयारी कर डालते हैं .... ऐसा हो सकता है कि मैं अल्लाह के होने का सबूत न दे पाऊं.. या तर्क वितर्क मे हार जाऊं.... पर अल्लाह पर से मेरा विश्वास डिगना अब इतना सहल नहीं .... क्योंकि अल्लाह बार बार मुझे अपने वजूद का एहसास करा चुका है ... तो जब मैं अल्लाह को छोटी छोटी बातों मे ही सही, बार बार अनुभव कर चुका हूँ तो किसी के कहने से कैसे मान जाऊं कि अल्लाह नहीं है ....॥
एक घटना सुनाता हूँ 

मैं हमेशा ऐसा स्टूडेन्ट रहा हूँ जो साल भर पढ़ाई से भागा रहता था, और सिर्फ पेपर्स मे जो हर पेपर के बीच एक दो दिन का गैप होता था उन्हीं एक दो दिन मे पूरा सिलेबस पढ़कर पेपर दे आता था, और 50% से ऊपर नम्बर ले आता था , इतना काफी था मेरे लिए 

एम.कॉम फाइनल के पेपर्स चल रहे थे अगले दिन पेपर था और रात मे मैंने अपना सिलेबस कम्पलीट करते करते थोड़ा मूड फ्रेश करने को फेसबुक खोला ...

खोला तो था कि देखकर बस 15 मिनट मे मोबाइल बंद कर के रख दूंगा ... पर मुझे किसी नास्तिक ने बहस मे उलझा लिया ... और मैं इस्लाम पर लगाए गए उसके आरोपों के उत्तर देने मे ऐसा लगा कि समय का पता ही नही चला ... उस समय बस इस बात की फिक्र थी कि मेरे नबी स. और मेरे अल्लाह को गालियां देना बंद की जाएं ....

काफी रात बीत गई और मैं पढ़े बिना सो गया.... सुबह उठा तो कालेज की तैयारी करने को भी वक्त कम था .... अब मैं इस बात से बहुत घबराया कि पेपर की तो मेरी तैयारी ही नहीं हो पाई अब अगर इस पेपर मे फेल हो गया तो साल बरबाद होगा सो अलग और बदनामी होगी वो अलग

मैं कालेज जा तो रहा था मगर खाली दिमाग ..... अल्लाह से बस यही दुआ करता चला जा रहा था कि या अल्लाह बचा ले ... मैं तेरे लिए रात मे पढ़ न सका मेरे मालिक ... तो अब तू ही कुछ ऐसा चमत्कार कर दे कि बस मुझे 2-3 घण्टे का वक्त मिल जाए और मैं वो तैयारी कर पाऊं जो मैं रात को नहीं कर पाया ...

बार बार मैं अल्लाह से 2-3 घण्टे का वक्त मांगता जा रहा था ... हालांकि मैं बड़ी बेवकूफ़ी कर चुका था वक्त पर पढ़ाई न कर के और अब मेरे साथ जो भी कुछ बुरा होता, उसका मैं ही जिम्मेदार था .... पर अब मैं दिल ही दिल मे वो कुछ बुदबुदाता जा रहा था, जो बात कोई भी सुन लेता तो या मुझ पर हंसता, या तरस खाता ... अल्लाह मुझे बस 2-3 घण्टे दिला दे मैं तमाम उम्र तेरा शाकिर रहूँगा

बुदबुदाते बुदबुदाते मैं कालेज के गेट पर जा पहुंचा ... स्टूडेन्ट आ रहे थे जा रहे थे, मेरा तो दिल डूब गया .... "या अल्लाह, ... मैं गया मेरे मालिक"

लेकिन ये कालेज के मेनगेट पर कौन सा पेपर चस्पा था, जिसे मेरे क्लासमेट पढ रहे थे....
मैने धड़कते दिल को काबू मे करते हुए उसे पढ़ा, और जो लिखा था उसे देखकर मेरी आंखे हैरत से फैल गईं ...

"अपरिहार्य कारणों वश आज प्रथम पाली मे होने वाला एम.कॉम अंतिम वर्ष का पेपर, पहली पाली से स्थगित कर के आज ही दूसरी पाली मे (चार घण्टे बाद) लिया जाएगा अत: छात्र दूसरी पाली के समय पेपर देने आएं ॥".......

मैंने आंखे फाड़ फाड़कर देखा ... क्या सच मे अल्लाह ने मेरी दुवा सुन ली ???? लफ्ज़ ब लफ्ज़ सुन ली ... मेरे दिल की गहराईयों से शुक्र की सदाएं बुलंद हुईं, कि मेरे मालिक ... मेरे अल्लाह, तू पाक है .. मैं निसार जाऊं.... लाख लाख लाख बार शुक्राना मेरे मालिक का ... 

मेरे मालिक ने मुझे दिखा दिया कि वो है ... मेरे मालिक ने मुझे बता दिया कि शिद्दत से मांगी हुई दुआ कितनी जल्दी कुबूल हो जाती है
मेरे मालिक ने मुझे समझा दिया, कि मैं उसकी याद करूं, तो वह मेरे साथ रहेगा ...
और मेरे मालिक ने मुझे ये बतला दिया कि कोई चीज़ तकदीर का फैसला बदल नही सकती , सिवाय दिल की गहराईयों से मांगी गई दुआ के ।

और हां, कहना न होगा, कि मैं फौरन घर लौटा और उस मिले हुए वक्त मे पढ़कर पेपर दे भी आया, और हमेशा की तरह पास भी हो गया ... पर ये वाकया हमेशा के लिए मेरे दिल पर एक न मिटने वाला नक्श बना गया था ॥"

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