मंगलवार, 25 मई 2021

आतंकवाद और इस्लाम: दो विपरीत ध्रुव

पिछले दिनों नाइजीरिया मे "बोको ह
राम" नाम के एक हराम संगठन ने वहाँ की तकरीबन 200 अबला लड़कियों को अगवा कर के इस कुकर्म को इस्लाम से जोड़ने की साजिश की बीबीसी के इण्टरव्यू मे मलाला यूसुफज़ई ने उन आतंकवादियो को मुसलमान मानते हुए उन्हें कुरान शरीफ पढ़ने की नसीहत की , यानि मलाला जैसी 15 साल की कमउम्र और अनुभवहीन लड़की को भी मालूम है कि आतंकवाद की मनाही है कुरान मे ..... हर उस मुस्लिम परिवार मे बच्चों को बहुत छुटपन से ही कुरान की शिक्षा दी जाती है जो परिवार धर्म से थोड़ा भी लगाव रखता है ... ऐसे मे कोई ये कैसे सोच सकता है कि मलाला जैसी कम उमर लड़की जो इस्लामी तालीम से ज्यादा झुकाव पश्चिमी तालीम की तरफ रखती है, उसे तो कुरान का ज्यादा ज्ञान है लेकिन उस से कहीं ज्यादा उम्र वाले मुसलमानों को कुरान का ज्ञान ही नही होगा और वो भी ऐसे मुसलमान जो कि इस्लाम के प्रेम मे मरने मारने की हद तक पहुंचने का दावा करते हों .... जाहिर है जब छोटे छोटे मुस्लिम बच्चों को भी इस्लाम की शांति की सीख का ज्ञान है तो फिर कोई परिपक्व बुद्धि वाला और इस्लाम से अतिरिक्त लगाव का दावा करने वाला व्यक्ति इस्लाम की इतनी अहम शिक्षा को न जानता हो ऐसा हो ही नही सकता ...... कुरान स्पष्ट रूप से और बार बार कहता है कि कोई मुसलमान से बुरा सुलूक करे तो भी मुसलमान उससे भला सुलूक करे, लड़ाई झगड़े को अपनी ओर से भरसक टालने की कोशिश की जाए, किसी भी निर्दोष की हत्या, चाहे वो मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम उसकी हत्या महापाप है, किसी भी स्त्री का बलात्कार चाहे वो दुश्मन की स्त्री क्यों न हो, महापाप है, और यदि युद्ध करना पड़े तो भी दुश्मन के स्त्रियों बच्चों और युद्ध मे भाग न लेने वाले शांतिप्रिय पुरुषों की सुरक्षा का ध्यान रखो कुरान की इन शिक्षाओ का पालन न करना हराम है .... और जबकि दुनिया भर के इस्लामी विद्वान बार बार बोको हराम और तहरीके तालिबान को चेता चुके हैं , कि ये आतंकवादी अल्लाह की आज्ञा की अवहेलना कर रहे हैं, और इस्लाम ने जिन कामों को सबसे ज्यादा बुरा गुनाह बताया है वो ही गुनाह ये आतंकी कर के दोजखी बन रहे हैं .... इसके बावजूद ये आतंकी संगठन अल्लाह की आज्ञा को फालतू मानकर अपनी दुष्ट मनमर्जी चलाये और फिर दावा करें कि वो ये इस्लाम के लिए कर रहे है तो इससे बड़ा झूठ मैं नहीं समझता कि कुछ और होगा ऐसे लोग या तो गैर मुस्लिम होते हैं, जो इस्लाम को बदनाम करने के लिए ये स्वांग रचते हैं , या यदि इनमे से कोई व्यक्ति पहले कभी मुस्लिम था भी तो अल्लाह की आज्ञा की जानबूझ कर और उद्दण्डता पूर्वक अवहेलना कर के समाज मे आतंकवाद फैलाने के कारण उसी दिन इस्लाम से खारिज हो चुके हैं जिस दिन इन्होंने पहली कोई हराम आतंकी वारदात कर के उसे इस्लाम से जोड़कर , इस्लाम को बदनाम करने की साज़िश को अंजाम दिया था खुद ध्यान लगाकर सोचिए कि बोको हराम जैसे ये आतंकी संगठन अपने इस्लामी ज्ञान से भरपूर होने का दावा करते हैं .... और पश्चिमी शिक्षा के विरोध जैसे महत्वहीन मुद्दे पर पराई लड़कियों को अगवा करने और उनकी इज़्ज़त का सौदा करने जैसे नाकाबिल ए माफी बदतरीन गुनाह करते है.... जिनकी इस्लाम मे बहुत सख्त सजा है और हर मुसलमान को पता है कि इस्लाम मे औरत की इज्जत से खिलवाड़ को सबसे बड़ा और सबसे घिनौना पाप कहा गया है ... तो बोको हराम के इस हराम कारनामे को कोई इस्लाम से किस तरह जोड़ सकता है ?? स्पष्ट है कि ये बोको हराम या तहरीक ए तालिबान या फिर इन्डियन मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठन मुस्लिमों के नही बल्कि मुस्लिमों के गैर मुस्लिम या बद अकीदा दुश्मनों के हैं मलाला जैसी कम उम्र लड़की से अभी इतनी गहरी सोच की आशा नहीं की जा सकती कि वो इस्लामी आतंकवाद के पीछे छिपी इस्लाम के दुश्मनों की गहरी साजिश को समझ सके मगर बाकी सबकी समझ को क्या हुआ है ??

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