शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021
कुन फयाकुन का अर्थ
हमारे एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि अल्लाह ने कायनात 6 दिन लगाकर क्यों बनाई , "होजा" कहकर तुरंत क्यों न बना दी जबकि यह तकनीक क़ुरआन सिद्ध है ??
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.... कमाल है भाई, अभी आपको ये समस्या है कि अल्लाह ने तत्क्षण ब्रह्मांड का निर्माण क्यों नहीं कर दिया, और अभी चन्द दिनों पहले आपको ही ये समस्या भी थी कि कुरआन में ब्रह्मांड के निर्माण की अवधि बहुत कम सिद्ध हो रही है,
..... याद कीजिये, आप ही ने कहा था कि क़ुरआन में अल्लाह का एक दिन कहीं 1000 साल, कहीं 10000 साल, और कहीं 50000 साल के बराबर बताया गया है, तो अगर इनमे सबसे बड़ी गणना भी लें तो भी 6 दिन में कायनात बनाने की अवधि केवल 3 लाख साल ठहरेगी जबकि विज्ञान के अनुसार सिर्फ़ धरती को ही अपने मौजूदा रूप में आने में करीब साढ़े पाँच अरब साल लगे।
.... और तब मैंने आपको बताया था कि अल्लाह के नज़दीक एक दिन के अलग अलग टाइम पीरियड बताए गए हैं, इससे ये बात साबित होती है कि अल्लाह के नज़दीक "यौम" का एक फिक्स टाइम पीरियड नही है बल्कि अल्लाह जिस हिसाब से इन्हें घटाना बढाना चाहता है, घटा बढ़ा लेता है ... तो ब्रह्मांड के निर्माण के समय अल्लाह का दिन 50,000 साल से भी बहुत बड़ा हो सकना सम्भव है....!!!
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..... भाई ये आपका "चित भी मेरी, पट भी मेरी" वाला हिसाब समझ नही आ रहा ?? आप वाक़ई जवाब जानना चाहते हैं या अपने सवालों में इंसान को उलझा कर खुद के ज़्यादा बुद्धिजीवी होने के अहम् की तुष्टि करना चाहते हैं ??
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..... बहरहाल, जान लीजिये कि आपका सवाल तर्कसंगत नही है.
... सवाल कुरआन में कही गई बात पर होना चाहिए, न कि अपने अनुमानों पर...
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ये सूरह यासीन (सूरह 36) की आयतें हैं
.... "और उसने हमपर फब्ती कसी और अपनी पैदाइश को भूल गया। कहता है, "कौन हड्डियों में जान डालेगा, जबकि वे जीर्ण-शीर्ण हो चुकी होंगी?" कह दो, "उनमें वही जान डालेगा जिसने उनको पहली बार पैदा किया। वह तो प्रत्येक संसृति को भली-भाँति जानता है, वही है जिसने तुम्हारे लिए हरे-भरे वृक्ष से आग पैदा कर दी। तो लगे हो तुम उससे जलाने।" क्या जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया उसे इसकी सामर्थ्य नहीं कि उन जैसों को पुनः पैदा कर दे? क्यों नहीं, जबकि वह महान स्रष्टा, अत्यन्त ज्ञानवान है, उसका मामला तो बस यह है कि जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है तो उससे कहता है, "हो जा!" और वह हो जाती है"
(आयत संख्या 78 से 82 तक)
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इन आयतों का अर्थ है कि अल्लाह हर प्रकार का कार्य, यहां तक कि कोई भी चमत्कारी कार्य करने के लिए भी सार्मथ्यवान है, और कोई भी काम ऐसा नही है जो अल्लाह न कर पाए, बल्कि वो जिस भी कार्य के करने की इच्छा करता है, केवल उसके आदेश देने भर पर वो कार्य स्वयमेव होने लगता है.
... यहां इन आयतों में तो कहीं ऐसा नहीं कहा गया कि अल्लाह कोई भी कार्य तुरत फुरत करता है,
... उल्टे इन आयतों में तो तुरत फुरत के ठीक विपरीत बात है कि काफ़िर अपनी मृत्यु के बाद कयामत में दोबारा ज़िंदा किये जाने की बात का मज़ाक उड़ा रहे हैं और उस बात पर अल्लाह ने उन्हें क़यामत आ जाने तक का इंतज़ार करने को कहा है....
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.... यानी यहां तो आयतें ये बता रही हैं कि अल्लाह को हर एक काम की सामर्थ्य प्राप्त है जिन कामों के लिए अल्लाह ने समय नीयत कर रखे हैं और समय आने पर अल्लाह द्वारा नीयत किया हुआ हर एक काम होकर रहेगा....
.... इन आयतों के आधार पर पता नहीं कौन से विज्ञान से आप ये अनुमान लगा रहे हैं कि अल्लाह ने हर काम तुरंत तत्क्षण पूरा कर देने की बात कही है....
.... ख़ैर अब से बात को ध्यानपूर्वक समझ लीजिए कि "कुन फ़याकून" का अर्थ अल्लाह के आदेश देने भर से नियति का तय हो जाना है, कि अल्लाह ने आदेश दे दिया तो फिर वो बात टल नही सकती... इसका अर्थ जबरन कुछ और न निकालिये .... धन्यवाद !!!
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